ट्रांसपोर्टरों को पुलिस व प्रशासन की शह, मनमाने तरीके से हो रहा कोल परिवहन ट्रांसपोर्टरों की चाहत, कम लागत में कमाएं अधिक मुनाफा

ट्रांसपोर्टरों को पुलिस व प्रशासन की शह, मनमाने तरीके से हो रहा कोल परिवहन ट्रांसपोर्टरों की चाहत, कम लागत में कमाएं अधिक मुनाफा


विवेक पाण्डेय जिला ब्यूरो चीफ सिंगरौली 



ट्रांसपोर्टरों को पुलिस व प्रशासन की शह, मनमाने तरीके से हो रहा कोल परिवहन
एनजीटी के ओवर साइट कमेटी का निर्देश ताक
- ट्रांसपोर्टरों की चाहत, कम लागत में कमाएं अधिक मुनाफा
- नतीजा कोयले की धूल फांकने को मजबूर ग्रामीण


मध्यप्रदेश सिंगरौली. सड़क मार्ग से हो रहे कोल परिवहन का दंश झेल रहे ग्रामीणों को राहत मिल सके। इस उद्देश्य से एनजीटी की ओवर साइट कमेटी ने भले ही तमाम तरह के निर्देश जारी किए हों, लेकिन यहां ट्रांसपोर्टरों की पुलिस व प्रशासन से मिलीभगत के चलते सारे नियम शिथिल पड़ गए हैं। नतीजा निर्देशों को ताक पर रखकर ट्रांसपोर्टर प्रतिबंधित रूट से मनमानी तरीके से कोल परिवहन कर रहे हैं। इसका खामियाजा उन ग्रामीण बस्तियों में रह रहे लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जो उन मार्गों के इर्द-गिर्द बसी हैं, जहां से कोल परिवहन किया जा रहा है।


ओवर साइट कमेटी की ओर से निर्देश जारी किए जाने के बाद करीब साल भर पहले तत्कालीन कलेक्टर ने घनी आबादी यानी शहरी क्षेत्र के सड़कों से हो रहे कोल परिवहन को प्रतिबंधित कर दिया था। तत्काल में कोल परिवहन के लिए ऐसा रूट निर्धारित किया गया था, जिससे कम से कम ग्रामीण बस्तियां रास्ते में आएं। हैरत की बात यह है कि समय बीतने के साथ तत्कालीन कलेक्टर का निर्देश हवा हो गया और अधिकारियों ने एक-एक कर कई ट्रांसपोर्टरों को शहरी क्षेत्र यानी प्रतिबंधित मार्ग से कोल परिवहन की इजाजत दे दी। पुलिस व प्रशासन की ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत का नतीजा यह है कि वर्तमान में माजन मोड़ से सैकड़ों वाहन हर रोज कोयला लेकर निकल रहे हैं। जबकि पूर्व में माजन मोड़ कोल परिवहन के लिए प्रतिबंधित रहा है।



कोल परिवहन के लिए निर्धारित रहा है यह रूट 
सड़क मार्ग से हो रहे कोल परिवहन का दंश कम से कम ग्रामीणों को भुगतना पड़े इसके लिए पूर्व में अलग रूट निर्धारित किया गया था। निर्धारित रूट के मुताबिक वाहनों को अमलोरी, निगाही, जयंत, दुद्धीचुआ, खडिय़ा व झिंगुरदह से मोरवा होते हुए गोरबी से बरगवां पहुंचने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद बरगवां से तेलदह, नौगई होकर परसौना होते हुए खुटार व रजमिलान का रूट निर्धारित था, लेकिन वर्तमान में रूट का पालन नहीं हो रहा है।


कोल परिवहन में लगे एक हजार से अधिक वाहन 
एनसीएल की विभिन्न खदानों से कंपनियों के लिए कोयला परिवहन में वर्तमान में एक हजार से अधिक वाहन लगे बताए जा रहे हैं। हालांकि कोल परिवहन के लिए अनुमति वर्तमान में चल रहे वाहनों की तुलना में 50 फीसदी से भी कम को मिली है। यह बात और है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कंपनियों की मिलीभगत के चलते बाकी के वाहन बिना अनुमति के साठगांठ से संचालित हो रहे हैं।


कोल परिवहन में लगे इन ट्रांसपोर्टरों के वाहन 
कोल कंपनी की विभिन्न खदानों में कोयला परिवहन में लगे ज्यादातर वाहन महावीर ट्रांसपोर्ट, एबीआई, महाकाल ट्रांसपोर्ट, गोदावारी ट्रांसपोर्ट, एके लॉजिस्टिक, जियो ट्रांसपोर्ट, त्रिमुला, एनएन ग्लोबल, सीएमपीएल चंद्रा सहित अन्य कई ट्रांसपोर्टरों के हैं। कुछ को छोड़कर ज्यादातर ट्रांसपोर्टर साठगांठ कर मनमाने तरीके से कोल परिवहन कर रहे हैं। साठगांठ शार्टकट मार्ग से कोल परिवहन करने और डीजल बचाने और कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के फेर में किया जा रहा है।


ओवर साइट कमेटी का निर्देश 
- सड़क मार्ग से कोल परिवहन बंद कर दूसरे विकल्प तैयार किए जाएं। 
- विकल्प तैयार होने तक निर्धारित रूट से किया जाए कोल परिवहन। 
- कोयला उड़े नहीं, इसलिए परिवहन में लगे वाहन पूरी तरह से ढके रहें। 
- कोयला गिरे नहीं, इसलिए किसी भी स्थिति में वाहन ओवरलोड नहीं रहें। 
- कोल परिवहन में लगे वाहनों दुर्घटना न हो, इसलिए स्पीड गवर्नर लगाएं।
कोल वाहनों का निर्धरित समय पर फिटनेस जांच हर हाल में होना चाहिए


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