ज्ञापन लेने नहीं पहुंची प्रशासन, बैल को सौंपा गया ज्ञापन

ज्ञापन लेने नहीं पहुंची प्रशासन, बैल को सौंपा गया ज्ञापन


जिला ब्यूरो चीफ विवेक पाण्डेय संवाददाता करुना शर्मा



रेत खदानों में मशीन लगाने  सहित भू अभिलेख सीमांकन ,नदियों में मशीनों की अनुमति को लेकर धरना


सिंगरौली। सिंगरौली जिले में रेत खदान संचालित होते ही खदानों में पीसी मशीन लगाकर रेत का उत्खनन कराया जा रहा है इतना ही नहीं कई जगह तो खदानें कहीं और रेत कहीं और से निकल रहा है जिसको लेकर पिछड़ा वर्ग महिला कांग्रेस अध्यक्ष अनु पटेल ने 4 जून को पिपराकुरुन्द रेत खदान पर धरना रखने की अनुमति मांगी थी 4 जून को सुश्री अन्नू पटेल के द्वारा रेत खदान पर धरना बैठने के बाद प्रशासन का कोई भी व्यक्ति ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा अंतिम समय में बैल को पकड़कर उसके गले में ज्ञापन सौंपकर ज्ञापन को पढ़ा गया जिससे यह चर्चा बना हुआ है कि खनिज अमला या प्रशासन बैल के समान है क्या क्योंकि प्रशासन को जब सूचना दी गई फिर ज्ञापन लेने न पहुंचना कहीं ना कहीं कई सवाल खड़ा करता है।।


ज्ञापन में कांग्रेस नेत्री अनु पटेल के द्वारा लिखा गया है कि कई रेत खदानों का ना तो सीमांकन हुआ है वहीं खदानों की भू अभिलेख की जांच कराने के लिए सहित रेत खदानों में लगी पीसी मशीनों की अनुमति को लेकर धरना के साथ ज्ञापन बैल को सौंपा गया।।


मध्य प्रदेश सरकार एक और मजदूरों को रोजगार को लेकर रेत खदानों में मजदूरों से रेत उत्खनन कराने के लिए अपील कर रही है वहीं दूसरी ओर सिंगरौली जिले में रेत ठेकेदार के द्वारा सहित खनिज अमला भी मिलकर रेत खदानों में पी सी मशीन से रेत उत्खनन कराने में लगा हुआ है।।


सिंगरौली में मजदूरों की भरमार....


पूरा देश कोरोनावायरस से बचने को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है अन्य राज्य एवं जिलों से जिले में तमाम मजदूर आए हुए हैं और पहले से ही यहां बेरोजगारी का आलम है जिसको लेकर मनरेगा के तहत सरकार रोजगार देने की बात कर रही है लेकिन पंचायतों में इतना काम नहीं है कि रोजगार दिया जा सके जहां मजदूरों को लगाने की जरूरत है वहां रेत खदानों में बड़ी-बड़ी पी सी मशीनें लगी हुई हैं जिसको लेकर मजदूरों एवं क्षेत्रवासियों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है।।


पुलिस सहित खनिज अमला का संरक्षण


जिले में चर्चा है कि खनिज विभाग एवं पुलिस विभाग सहित राजनीतिक दल के लोग भी ऐसे रेत कारोबारियों को संरक्षण दे रहे हैं देने का कारण यह है कि कहीं ना कहीं इन्हें रेत कारोबारी से व्यक्तिगत लाभ मिला होगा नहीं फिर जनता भूखे मरे जनप्रतिनिधि और शासन प्रशासन चुप्पी साधे बैठे यह हो ही नहीं सकता लेकिन जहां किसी अधिकारी या नेता का व्यक्तिगत स्वार्थ होता है वहां संरक्षण देने के अलावा कर भी क्या सकते हैं, जिसको लेकर जिले में जनप्रतिनिधियों एवं पुलिस सहित जिला प्रशासन का किरकिरी हो रही है


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