ग्रामीणों को दहशतजदा किये हैं प्राचीन इमारत से आती हुईं अजीब आवाजें, हवाई चक्कर तो कहीं षड्यंत्र की चर्चाएं

ग्रामीणों को दहशतजदा किये हैं प्राचीन इमारत से आती हुईं अजीब आवाजें, हवाई चक्कर तो कहीं षड्यंत्र की चर्चाएं


संवाददाता सचिन यादव फर्रुखाबाद



कभी इस इमारत में रहा करते थे क्षेत्र के एक रहीस, सन्नाटे में बचाओ-बचाओ की आवाजें सुनकर कांप जाते हैं ग्रामीण


जनपद फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश रिर्टन विश्वकाशी (RV NEWS LIVE) व्यूरो न्यूज- फर्रुखाबाद। विकास खण्ड कमालगंज के गांव ईशापुर में लगभग आधी सदी पहले बनी पुरानी इमारत से आतीं हुईं अजीब आवाजें इन दिनों क्षेत्रीय ग्रामीणों को दहशतजदा किये हुये हैं। चर्चा है कि इस पुरानी इमारत में कोई हवाई चक्कर है तो कहीं पर लोग चर्चा करते सुने जाते हैं कि किसी षड्यंत्र के चलते इमारत पर कब्जा करने को लेकर इस प्रकार का दिखावा किया जा रहा है। उधर गांव के ही कुछ रहने वालों का कहना है कि पुरानी होती मरम्मत को तरसती यह इमारत अगर ढह गई तो अपने साथ न जाने कितनी जाने ले जाएगी।
संभावनायें कुछ भी हों लेकिन वर्तमान में इमारत से आने वाली बचाओ-बचाओ की गूंजती हुई आवाजें गांव के लोगांे को कंपा देने के लिए काफी हैं। बताते चलें कि क्षेत्र के एक रहीस राजनेता तरीक सेठ के बुजुर्गों द्वारा 1979 में यह इमारत बनवाई गई थी। मुगलिया नक्काशी को अपने भीतरी कमरों में समेटे यह पुरानी इमारत अवशेष बनने की ओर अग्रसर है। इस चैमंजिला इमारत के आगे के हिस्से में लगी सीमेंट की जाली जर्जर होकर टूट चुकी है। जगह-जगह पर हो गये खाली स्थानों से आवाज आने और यहां पर साये मंडराने की भी चर्चा होती रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांशतः रात के तीसरे पहर में खतरनाक आवाजों से इमारत गूंजती है। समय-समय पर बचाओ-बचाओ की आवाजें रात के सन्नाटे में लोगों की नींदें उड़ाती हैं। पहले तो किसी को यकीन नहीं हुआ लेकिन अब शायद गांव में कोई ऐसा व्यक्ति नहंी है जो इस बात से वाकिफ न हो। लोगांे ने हिम्मत जुटा कर इमारत के बाहर से आवाजों से बात करने की भी जहमत उठाई और जब बातचीत हो गई तो उधर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। हालांकि अभी तक किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार का नुकसान होने की खबर नहीं है। गूंजती हुई आवाजें अपने आप शांत हो जाती हैं। गर्मियों की सन्नाटेदार दोपहरों में भी आवाजें आने की चर्चाएं होती रहती हैं।
इसे अंधविश्वास मानें या आस-पास के निवासियों का बनाया हुआ स्टंट। पड़ोस के रहने वाले अबू वकर, नुईम, शौकीन, छुट्टू, अनवर, अंसार, तौसीफ आदि का कहना है कि अगर यह जर्जर इमार कहीं ढह गई तो भारी जान और माल का नुकसान होगा। ऐसा समझा जा रहा है कि इस प्रकार की भुतही चर्चाएं करकेे मुंबई में रह रहे हाजी तरीक सेठ का इस इमारत की ओर ध्यान आकर्षित किया जा सके और शासन-प्रशासन भी इस ओर देखे जिससे इमारत को या तो ढहा दिया जाये या फिर इन आवाजों की जांच करके इमारत की मरम्मत करवाई जाये ताकि लोगों की जान पर बना खतरा अपना मूर्त रूप न ले सके ?


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