सिंगरौली जिले के एक जैसे मामलों में पुलिस अधिकारियों के साथ अलग व्यवहार क्यों?

सिंगरौली जिले के एक जैसे मामलों में पुलिस अधिकारियों के साथ अलग व्यवहार क्यों?


जिला ब्यूरो चीफ विवेक पाण्डेय कैमरामैन राहुल देव प्रजापति



मध्य प्रदेश जिला सिंगरौली रिर्टन विश्वकाशी (RV NEWS LIVE) ब्यूरो न्यूज़/सिंगरौली पुलिस महकमे में इस समय शासन चौकी चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में बैढन थाना क्षेत्र के शासन चौकी में घटी लगभग एक जैसी घटनाओं में वहां पदस्थ पुलिस अधिकारियों के साथ अलग व्यवहार को लेकर लोगों में खासी चर्चा है कि कहीं स्थानीय नेताओं की नाराज़गी या उच्च अधिकारियों की आंखों की किरकिरी के कारण ही तो शासन चौकी प्रभारी के तौर पर पदस्थ रहीं प्रियंका मिश्रा पर कार्रवाई की गाज गिरी थी। क्योंकि लंबे समय से सकुशल कार्यभार संभाल रहीं 



उपनिरीक्षक प्रियंका मिश्रा 


को जुलाई माह में नाबालिग से रेप और हत्या के मामले में लापरवाही बरतने के लिए तत्काल लाइन अटैच कर दिया गया था और अब उनपर विभागीय जांच जारी है। परंतु उन्हें हटाकर चौकी प्रभारी का पदभार दिए गए उपनिरीक्षक भिपेंद्र पाठक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। इसी माह की शुरुआत में ग्राम बसौड़ा पोस्ट जिरहा की फरियादी के आवेदन पर ध्यान नहीं देने के कारण एक मासूम महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह क्षेत्र में अपनी तरह का एक सनसनीखेज मामला था जहां पति ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर शव को अलग-अलग हिस्सों में घर के अलग कमरों में गाड़ दिया था। यह बात सामने आई थी कि हत्या से 1 दिन पहले मृतिका ने शासन चौकी प्रभारी से मदद की गुहार लगाई थी पर उन्होंने इसे अनसुना कर दिया था। जिस कारण उसे दर्दनाक मौत मिली। परंतु चौकी प्रभारी के लिए शायद सब छूट है, यह कहा जाए की पुलिस अधिकारी इनपर मेहरबान है। तभी तो घटना के सप्ताह भर बीत जाने के बाद भी चौकी प्रभारी पर कोई कार्यवाही होती नहीं दिखाई दे रही।  इस मामले पर चर्चा के दौरान सिंगरौली पुलिस अधीक्षक बीरेंद्र कुमार सिंह ने मृतिका द्वारा थाने में शिकायत की बात संज्ञान में आने की कबूली, वहीं इसकी जांच कर कार्यवाही की बात भी कही। परंतु सप्ताह भर बीत जाने के बाद भी सब जस का तस है। जुलाई माह में नाबालिका के साथ घटी हृदय विदारक घटना के बाद कुछ संगठन व स्थानीय नेता खुलकर चौकी प्रभारी प्रियंका मिश्रा के विरोध में आए थे, वहीं चौकी का घेराव कर उन्हें तत्काल हटाए जाने की मांग की थी पर वही लोग इस माह हुए जघन्य हत्याकांड में दूसरे की बेटी के लिए न्याय मांगने के समय खामोश रहे। क्या किसी की जान इतनी सस्ती है? क्योंकि यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण ही बिट्टी देवी केवट को अपनी जान गवानी पड़ी।
परंतु फिर भी इस मामले में अभी तक कोई कारवाही नहीं हुई है। पुलिस महकमे में अधिकारियों के साथ इस प्रकार का दोहरा व्यवहार कई सवालों को जन्म देता है। क्या यह न्याय संगत है? इस मामले की भी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और जांच के दौरान वहां किसी और को पदस्थ किया जाना चाहिए क्योंकि कईयों का ऐसा मानना है कि पद पर बने रहते हुए निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। वहीं कई यह भी मानते हैं कि इस मामले की जांच भी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से कराई जानी चाहिए। नहीं तो इससे समाज में गलत उदाहरण प्रस्तुत होगा। बाहर हाल जब तक इस मामले में पुलिस के बड़े अधिकारियों द्वारा कोई संतोषजनक उत्तर नहीं आता, तब तक यह कयास जारी रहेगा की सिंगरौली पुलिस महकमे में कर्तव्य परायण लोग विभाग की राजनीति का शिकार होते रहेंगे।


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