लॉकडाउन में सरकार का सौतेला और गैर जिम्मेदाराना रवैया झुग्गी झोपड़ियों में नहीं पहुंचा कोई मददगार बच्चे बुजुर्ग महिला एक एक रोटी के लिए हैं परेशान

लॉकडाउन में सरकार का सौतेला और गैर जिम्मेदाराना रवैया झुग्गी झोपड़ियों में नहीं पहुंचा कोई मददगार बच्चे बुजुर्ग महिला एक एक रोटी के लिए हैं परेशान 

गौतमबुध नगर संवाददाता नेहा कुमारी व वंदना की लाइव रिपोर्ट 



जिला गौतमबुद्ध नगर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में रहने वाले झुग्गी झोपड़ी वासी दिखे भोजन पानी को लेकर काफी परेशान जब हमारे संवाददाता नेहा कुमारी व वंदना ने जमीनी अस्तर से उनके व्यवस्थाओं व तकलीफों की पड़ताल की तो सरकार की व्यवस्थाओं पर काफी शर्म आ रही थी ऐसे लग रहा था कि सरकार की सारी व्यवस्थाएं सिर्फ कागज पर ही रुका हुआ है वही झोपड़ी वालों को कहना है कि अभी तक हमारे आस पास सरकार का कोई भी मददगार नहीं दिखा और ना ही सरकार ने किसी भी अपने अधीनस्थ अधिकारी को हमारा हालचाल लेने भेजा 



हम लोग अपने बच्चों को किस तरीके से इस लॉकडाउन में पाल रहे हैं बस सिर्फ हम गरीब व असहाय लोग जान सकते हैं हम लोग एक एक रोटी के लिए परेशान हो चुके हैं हमारे बच्चे भूख प्यास से बिलखते रहते हैं और हम लोग कुछ भी नहीं कर पाते क्योंकि सरकार ने लॉकडाउन लगा रखा हुआ है और हम लोग बाहर कहीं कमाने जा नहीं सकते जिससे कि हम अपने बच्चों के लिए रोटी की व्यवस्था कर सकें हम झुग्गी झोपड़ी वासी सरकार के बनाए हुए नियमों का सम्मान जनक तरीके से पालन करते हैं और हमेशा करते रहेंगे 



लेकिन सरकार को भी हमारे दुख दर्द और भूख प्यास के बारे में सोच विचार करना चाहिए क्योंकि ना हमारे पास कोई बिजनेस धंधा है ना कोई रोजगार, ना कोई खेती है और ना ही कोई मकान फिर हमारा और हमारे परिवार एवं बच्चों का पेट कैसे भरता होगा इस पर कभी सरकार ने अपने सांसद विधायक व अधिकारियों से कभी विचार-विमर्श नहीं किया होगा और ना ही हमारे परेशानियों को जानने के लिए किसी भी अपने अधीनस्थ अधिकारी या सांसद विधायक के मुलाजिम को हमारे झुग्गी झोपड़ियों में नहीं भेजा 



हम गरीबों के लिए कोई भी मसीहा बनने वाला नहीं है क्योंकि हम लोग गरीब और असहाय लोग हैं हम लोग सरकार या उनके अधिकारियों का कर भी क्या सकते हैं सिर्फ वोट दे सकते हैं वोट देने का अधिकार है बाकी हमें अपने लिए किसी भी आवश्यक की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए मांगने या शिकायत करने का अधिकार नहीं है झुग्गी झोपड़ी वासियों ने कहा कि हम सरकार से गुजारिश करते हैं कि लॉकडाउन के समय मे हम लोगों के लिए भी खाने पीने की व्यवस्था की जाए जिससे हमारे बुजुर्ग महिला-पुरुष व बच्चे जिंदा रह सके अगर ऐसा नहीं सोचा गया तो हम लोग कोरोनावायरस जैसे संक्रमित बीमारी से मरे या ना मरे लेकिन भूखे प्यासे एक एक रोटी के लिए जरूर मर जाएंगे, हमारे संवाददाता ने कहा झुग्गी झोपड़ियों में वास्तव में काफी परेशानियां देखने को मिला इस पर सरकार को विचार विमर्श करना चाहिए जिससे इनका जीविका उपार्जन चल सके और इनकी परेशानियां कम हो सके



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