कोयला खदानों से सरकार को मिलता है करोड़ों का राजस्व, होता है आर्थिक और सामाजिक विकास

कोयला खदानों से सरकार को मिलता है करोड़ों का राजस्व, होता है आर्थिक और सामाजिक विकास

जिला सिंगरौली मध्यप्रदेश से ब्यूरो चीफ विवेक पाण्डेय की खास रिपोर्ट 



जिला सिंगरौली मध्यप्रदेश रिर्टन विश्वकाशी राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र (RV NEWS LIVE) ब्यूरो न्यूज़-देश की ऊर्जाजन्य ज़रूरतों की पूर्ति के लिये महत्त्वपूर्ण और आर्थिक विकास की धुरी माना जाने वाला विद्युत क्षेत्र कोयले की आपूर्ति जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। बिजली उत्पादन कोयले की उपलब्धता पर निर्भर करता है क्योंकि अपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों से बिजली आपूर्ति में फिलहाल 10 फीसदी मदद भी नहीं मिल पा रही है। देश में बिजली की मांग के करीब 70 फीसदी हिस्से का उत्पादन कोयले पर निर्भर है जबकि कोयले की खपत का 75 फीसदी हिस्‍सा बिजली के उत्पादन पर ही खर्च होता है। किसी भी परियोजना के शुरू होने पर उससे हजारों स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी होती है लेकिन कभी-कभी कुछ स्थानीय असामाजिक तत्वों के द्वारा निजी स्वार्थ के कारण स्थानीय ग्रामीणों को उकसाया जाता है जिससे ना सिर्फ उनका रोजगार प्रभावित होता है बल्कि उत्पादन प्रभावित होने से सरकार को मिलने वाले राजस्व में भी कमी आती है। 

सुलियरी खदान के बंद होने से सरकार को होगा सालाना 800 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान

देश में कोयला उत्पादन के मामले में मध्य प्रदेश चौथे स्थान पर है, जहां देश का 7.8% कोयला भंडार है और जो भारत के कुल कोयला उत्पादन में 13.6% का सहयोग करता है. कोयला मंत्रालय के मुताबिक देशभर में सरकारी और निजी क्षेत्रों को मिलाकर कुल 488 कोयला खदानों में से मध्य प्रदेश में 79 खदान हैं।  वहीं प्रदेश ने साल-दर-साल कोयले के उत्पादन में वृद्धि दिखाई हैं, जहां वर्ष 2021 के दौरान 132.531 मिलियन टन कोयला उत्पादन की तुलना में वर्ष 2022 के दौरान 137.953 मिलियन टन उत्पादन दर्ज किया गया है। लेकिन यह विडम्बना ही है कि प्रदेश के सिंगरौली जिले में स्थित एपीएमडीसी की सुलियरी जैसे कोल प्रोजेक्ट को सही तरीके से संचालित करने में कुछ बाहरी तत्वों और निजी स्वार्थी लोगों के कारण परेशानी हो रही है।  गौरतबल है कि इससे हजारों लोगों  की रोजी-रोटी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से जुड़ी हुई है। अगर इस खदान के बंद होने की नौबत आयी तो सरकार को सालाना 800 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा।  

सिंगरौली जिले में कोयला खदान के संचालन से पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में जो बदलाव आया वह अब दिखने लगा है। कोयला खदान और बिजली  कम्पनीओ के कारण यहां के लोग आर्थिक रूप से ना सिर्फ अपने आप को मजबूत कर सके, बल्कि उनके सामाजिक स्तर में भी काफी सुधार देखा जा रहा है। वहीं जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों स्थानीय लोगों को नौकरी मिली है। ग्रामीणों मानते हैं कि खदान एवं बिजली संयंत्रों में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से ना सिर्फ गांव के युवाओं को रोजगार मिला बल्कि स्थानीय महिलाओं को भी स्वरोजगार के कई अवसर प्रदान किए गए हैं, जिससे कि महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्थानीय लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में सुधार के अलावा उन्हें अस्पताल, विद्यालय, पेयजल, एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही है। सुलियरी खदान अकेले  करीब 1200 बच्चों के लिए अद्यतन स्कूल और सैकड़ों परिवारों के लिए आधुनकि सुविधाओं से युक्त शानदार कॉलोनी का निर्माण किया जा रहा है। 

मध्यप्रदेश के विपुल खनिज भण्डार राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास की प्रमुख कड़ी है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2020-21 के दौरान 132.531 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ जिससे प्रदेश को हजारों करोड़ का राजस्व मिला। कोयले की खनन से मिलनेवाले रॉयल्टी के तौर पर वर्ष 2020 में मध्यप्रदेश सरकार को 1,489.44 करोड़ मिला। अगले 10 सालों में 22 और कोयला खदानों के नीलामी से राजस्व के तौर पर कुल 36,562.30 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें मध्यप्रदेश के 8 खदानों की नीलामी से 9,494.03 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। कोयला ब्लॉक की नीलामी से इन क्षेत्रों में 2.8 लाख नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।

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